MP अजब है, सबसे गजब है…

​हिंदुस्तान का दिल इस समय दहला हुआ है।

हाँ साहब, बात यहाँ मध्यप्रदेश की हो रही है। 

वहीं जहाँ पर देवी अहिल्याबाई ने राजपाट चलाने का तरीका लोगों को सिखाया था, वहीं जहाँ पर महाकाल ने अपना डेरा बनाया था, वहीं जहाँ पर राजा महाराजाओं ने थोक के भाव से किले बनाये थे, वहीं जहाँ के जंगलों में मोगली और शेरखान की रचना हुई थी, वहीं जहाँ पर हर किस्म के खाने को एक अलग ही स्वाद दिया गया था, वहीं जहाँ के शांतिप्रिय और अमन पसंद लोगों की मिसालें दी जाती थी।
एक मिनट, एक मिनट, ज्यादा बोल गया हूँ लगता
शांतिप्रिय????

अमन पसंद जनता???

भिया,बड़े, मजाक कर रहे हो क्या?? 😂😂😂


ऐसा लग तो नहीं रहा है।

अभी थोड़े दिन पहले तो भोपाल में आग लगी हुई थी। शांतिप्रिय लोगों के नए नवेले ढूंढे हुए धर्मस्थल पर कोई भगवान, अल्लाह की पूजा नहीं करने दे रहा था। सिर्फ इतना ही कहा था ना कि सबसे बड़े सरकारी अस्पताल का ब्लड बैंक तोड़ दो, गलत क्या था?? 

भगवान जरुरी है, या एक इंसान जो वैसे भी उसके पास ही जाने वाला है, फालतू लोड लेते हो, अस्पताल क्या अब मंदिर/मस्जिद से ज्यादा जरुरी है??

या फिर शहरों में हड़ताल के नाम पर दूध, सब्जियों को बाजार में आने से रोका जा रहा था? और कुछ नहीं तो कुछ शरीफ लोग तो दूध के टैंकर बहा रहे थे, सब्जियाँ बर्बाद कर रहे थे, दुकानें लूट रहे थे। अब इंसान का खाना क्या हड़ताल से भी ज्यादा जरुरी है?? रमजान का पाक महीना चल रहा है, थोड़े से रोज़े हिन्दू रख लेते, तो मुसलमान भाईयों को अच्छा ही लगता ना!! नहीं भिया, इनको तो सब्जियाँ खानी है, दूध पीना है, अबे इतने खुदगर्ज हो गए कि कुछ दिन भूखे नहीं रह सकते। क्या फर्क पड़ता है अगर 6 महीने के बच्चे को ऊपर का दूध नहीं मिला तो?? मरेगा तो नहीं, थोड़े से कुपोषण से क्या बिगड़ जायेगा, भारत में वैसे भी बहुत से बच्चे कुपोषित है।

सुना है किसानों पर गोलियाँ चलायी गयी। अब आधा मीडिया (जो कि बिकाऊ है) कह रहा है कि वो किसान नहीं थे, और दूसरा आधा मीडिया (यह भी बिकाऊ है) कह रहा है कि वो किसान थे, यहाँ तक कि उनके खेत, कुएँ, गाय-बैल भी गिनवा लाया। किसान थे या नहीं, इंसान तो थे। पर हाँ, इंसान की जान की कीमत ही क्या है, मैं भी कितना मुर्ख हूँ।



कुछ लोग बसें जला रहे थे, एम्बुलेंस (108 वाली 😢😢) जला रहे थे, पुलिस की गाड़ियाँ जला रहे थे, और तो और निजी वाहन भी जला रहे थे (महंगे वाले, Audi, Mercedes, इत्यादि, क्योंकि खुद की खरीदने की औकात नहीं है, तो अंदर की जलन को बाहर लाओ और फूँक दो)। औरतों और बच्चों को पत्थर मार रहे थे, गाड़ियाँ लूट रहे थे (खासकर शराब ले जाने वाली, रात का भी तो जुगाड़ करना है, पानी थोड़ी पियेंगे, इतनी मेहनत की है दिन भर)। टोल नाके पर तोड़फोड़ कर रहे थे, लूट रहे थे।

कुछ महान नेता, जो हमारे बड़े आदरणीय है, कैमरे के सामने भी शेखी बघार रहे थे की यदि उनकी नाजायज़ मांगे नहीं मानी, तो वो आग लगा देंगे, पुलिस थाना तक जला देंगे। अरे भाई, जलाना है, तो चुपचाप जला दो, टीवी पर आके अपने मानसिक दिवालिये होने का प्रमाण क्यों देते हो? मारो, पीटो, लूटो, पर पकड़े मत जाओ, क्योंकि, “जो पकड़ा गया, वह चोर; और जो बच गया, वह साहूकार”।



इधर हमारे प्रदेश के मुखिया अनशन करेंगे, क्योंकि संविधान ने इनको कोई प्रशासनिक ताकत तो दी नहीं है। वोट तो इन्होंने तम्बूरा बजाने के लिए माँगे थे। आम जनता जाए भाड़ में, खुद की रक्षा खुद ही कर ले, हम तो इस समय पर गांधीगिरी करेंगे। सच ही कहा है, कि “रोम जब जल रहा था, तो नीरो बाँसुरी बजा रहा था”।



इधर हमारे भावी प्रधानमंत्री (बाप रे, क्या कह गया मैं), जो कि ऐसे मौके नहीं छोड़ते अपने राजनैतिक तवे पर रोटियाँ सेकने के लिए, पुलिस से हाथापाई करने और बिना हेलमेट के बाइक पर ट्रिपल सवारी करते हुए पकड़े गए है, और नजरबन्द है (नजर न लगे, भगवान से बस यही दुआ है)

बाकी हर बात पर ट्वीट, फेसबुक, इंस्टाग्राम करने वाले हमारे साब ने अभी तक कुछ भी नहीं कहा है, व्यस्त होंगे, छोड़िये, कहाँ उनको परेशान करेंगे??…
आप सभी पर्यटन प्रेमी जनता से यहीं निवेदन है कि कुछ भी देखिये, पर हिंदुस्तान का दिल मत देखिये, क्योंकि……

The Heart of Incredible India

MP अजब है, सबसे गजब है !!!…

धन्यवाद।। 🙏🙏🙏

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