सोशल मीडिया की दुनिया: नमूनों का मेला, मेले में मैं अकेला

इससे पहले की आप इस लेख के ऊपर राय बना ले, मैं इतना बता दूँ कि सोशल मीडिया के इस्तेमाल से मुझे कोई परहेज नहीं है, उल्टा मैं खुद इस पर दिन भर बैठा समय और दिमाग ख़राब करता रहता हूँ। जब इंटरनेट फ्री नहीं था, तब भी दिन भर इंटरनेट चालू रहता था, अब जब फ्री वाला मिल गया है, तब तो इंटरनेट दिन भर चालू रहना लाज़िमी है। बस फर्क इतना आ गया है कि पहले फेसबुक पर शेयर किये हुए वीडियो नहीं देखता था, अब समय और उचित स्थान मिलने पर वह भी देख लेता हूँ। 
हाँ तो में कह रहा था कि इस लेख का उद्देश्य किसी को नीचा दिखाना नहीं है, ना ही किसी को बदनाम करना है। उद्देश्य तो वैसे भी कुछ नहीं है, लिखने का मन है, सो लिख रहा हूँ। और वैसे भी फेसबुक, व्हाट्सएप्प, ट्विटर इत्यादि के विषय में जितना लिखो, उतना कम है। 

तो पहले शुरू करते है, उन लोगों से जो प्रबुद्ध (हाहाहाहाहा…) चिंतक है। प्रबुद्ध लिखना मेरी मजबूरी है, बुरा मान गए तो लिखने नहीं देंगे, पोस्ट को बार बार रिपोर्ट करेंगे; तब तक जहरीले कमेंट करेंगे, जब तक की मैं उन्हें अपशब्द इस्तेमाल करने के बाद ब्लॉक नहीं कर दूँ। इन चिंतको का मुख्य कार्य है, चिंता करना। हर विषय पर, भले ही वह समाज पर हो, धर्म पर हो, देश पर हो, गली के शर्माजी की छोटे कपडे पहनी लड़की या लंबे बाल रखे लड़के पर हो; छोटू के इम्तिहान के नतीजों पर हो, या राम की नौकरी और तनख्वाह पर हो। यह लोग उस कहावत से बिल्कुल तात्पर्य नहीं रखते कि, “चिंता चिता के समान है“, क्योंकि यह अपनी चिंता रूपी चिता पर खुद नहीं लेटते, दूसरे भले मानुषों को लेटा देते है। यह हर विषय पर चिंता कर सकते है, या यूँ कहे, दे सकते है। और इसके लिए इनके पास अपने दैनिक कार्यों के बाहर समय भी मिल जाता है। इनको देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की भी चिंता है और इसी चिंता में यह घुले जा रहे है, कि इनके  स्वर्ग गमन के पश्चात देश का क्या होगा??

दूसरे जो लोग आजकल बहुतायत में फेसबुक पर भिनभिनाते पाये जाते है, वह है समाज सुधारक। इनका नाम ही बयाँ करता है कि यह किस किस्म के विशेषज्ञ है। इनका सबसे पहला काम है, फेसबुक पर कैंसर से पीड़ित बच्चों, एक्सीडेंट से हाथ, पैर और जाने क्या क्या खो चुके लोगों, सड़े-गले घाव से पीड़ित जानवरों की फ़ोटो शेयर करना, जिससे मार्क जुकेरबर्ग उन बेसहारा लोगों और जानवरों को एक डॉलर दे सके जिससे उनका इलाज़ बेहतर ढंग से हो सके, या फिर कमेंट में amen लिखना जिससे इसा मसीह इन बच्चों  के लिए दुआ सुन ले, और इनका जीवन बेहतर बनाये। अब कौन इन समाज सुधारकों से बहस करे, कि मार्क जुकेरबर्ग चाहे तो, आपकी पोस्ट शेयर करे बिना ही इनको कुछ पैसा दान कर सकता है (चाहे तो, कोई जोर जबर्दस्ती नहीं है, पता चला आप उसे भी गरियाने लग गए कि मतलबी है, दान नहीं करता)। इस के अलावा इन लोगों के पास समाज सुधारने के और भी कई तरीके है, जैसे मोदी जी या योगी जी के फ़ोटो वाले   पोस्ट शेयर करना, जिसमे लिखा होता है, “क्या आप मेरे साथ है, अगर हाँ, तो शेयर कीजिये“। हँसने की बात नहीं है, हजारों लोग शेयर भी कर लेते है। इसके अलावा और जो पोस्ट शेयर की जाती है, उनमे प्रमुख है, घरों और बाथरूमों की डिज़ाइन (क्योंकि आर्किटेक्ट तो मूर्ख है), खाना बनाने के नए तरीके (जिससे हमारी मॉडर्न ज़माने की महिलायें खाना बनाना सीख सके), देसी और विदेशी नुस्खे जिससे इंसान स्वस्थ रह सके (एलोपैथी का डॉक्टर तो पैदाइशी मूर्ख है, या फिर लूटेरा है)। इन सब को शेयर करके यह  लोग समाज सुधारने में विशेष रूप से योगदान देते है।

तीसरे प्रमुख किस्म के लोग है, रायचंद।। हर व्यक्ति,हर विषय, हर घटना, हर स्तिथि पर अपनी राय देने वाले। चिंता मत कीजिये, यह लोग सोशल मीडिया के पहले भी मौजूद थे, और अब भी है। बस फर्क इतना है की सोशल मीडिया की बहुव्यापी पहुँच के कारण इनकी राय रूपी बैलिस्टिक मिसाइल की घातकता बहुत ज्यादा हो गयी है। यह असल मायने में बुद्धिजीवी है। इनके पास हर तरह की राय है। मोदीजी ने नोटबन्दी की, उससे बचें कैसे, इस पर राय; पेट्रोल के दाम बढ़ गए, उससे बचने की राय; बच्चे का एडमिशन कराना है, उस पर राय; PSC की तैयारी करनी है, उस पर राय; तबियत ख़राब है, उस पर राय; घर खरीदना है, उस पर राय; आत्महत्या करना है, उस पर राय(माफ़ कीजियेगा, बहुत संवेदनशील विषय है, बुरा लगे तो क्षमा प्रार्थी हूँ)।।

राय, राय, राय।। राय पर राय मिलती है साब, निदान नहीं मिलता। बस इस किस्म के नाटक करके यह लोग वर्चुअल समाज में भी अपनी धाक जमा लेते है

इन सब के अलावा निम्न कुछ और भी लोग मिल जाते है, सोशल मीडिया पर:

1. गुड मॉर्निंग, गुड नाइट वाले सन्देश करने वाले (फोकटी साले)

2. प्रकृति और शेर हाथी आदि की तस्वीरों के साथ दिल देहला देने वाले so called motivational सन्देश भेजने वाले

3. हिन्दू, मुस्लिम धर्म के ठेकेदार, और दंगे करा सकने वाले ज्वलनशील सन्देश भेजने या पोस्ट करने वाले (मेरा बस चल तो इनको पहले जेल में डालूँ), और बदकिस्मती देखिये, सबसे ज्यादा लाइक्स, कमेंट्स और शेयर यही सन्देश किये जाते है।

4. हर स्तिथि, व्यक्ति पर मजाक या कटाक्ष कर सकने वाले, यह लोग मेरे पसंदीदा है, जिंदगी की उलझनो में यही तो मन की गाँठे सुलझा रहे है।

5. फ़ोटो पर 5 या 7 कमेंट करके जादू देखने वाले (😂😂😂😂😂😂)

6. सातवीं-आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे, जो अपना नाजुक सा दिल टूटने की वजह से शेरों-शायरी करने लगते है, “I trust no one now”, और ” Single and Proud” जैसे स्टेटस डालने वाले (पढ़ाई कर लो नालायको, दिल का पता नहीं, माँ-बाप हड्डी पसली जरूर तोड़ देंगे)।
और भी है, जैसे यह बेसिरपैर का लेख लिखने वाले मेरे जैसे पढे-लिखे गँवार। पर क्या करूँ, अपनी और बेइज्जती नहीं कर सकता, इसलिए इस लेख को यही विराम देता  हूँ।

धन्यवाद।।

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