हमारे महान देश की Not so महान न्यायपालिका

​नमस्कार मीलार्ड। आप का समय ख़राब करने के लिए क्षमा चाहता हूँ। आखिर आप देश के एक प्रबुद्ध, प्रमुख नागरिक है और मैं एक छोटा अदना सा आदमी। आप देवता है और मैं भक्त कहलाने के लायक भी नहीं हूँ। पर क्या करे, समय ही ऐसा है की मैं सवाल कर रहा हूँ और आपसे जवाब माँग रहा हूँ। आजकल आरटीआई (RTI) का जमाना है और मैं तो उसे भी करने में असमर्थ हूँ (क्योंकि कमजोर हूँ, गरीब भी हूँ)। पर क्या करू, आ गया हूँ अपना मुँह उठाये कि माननीय जवाब देंगे। प्रश्नों का कुछ समाधान देंगे। 

तो साब, पहले बता दूँ की पेशे से चिकित्सक हूँ; जी हाँ वही चिकित्सक जिसे लोग लूटेरा, धरती का पिशाच और जाने कौन कौन सी उपाधियों से नवाजते है (फेसबुक पर ऐसे दो कोड़ी के पेज चलाने वालो की कमी नहीं है)। भगवान तो कभी था नहीं, इंसान रहने लायक भी नहीं छोड़ा है। कोई भी आकर डाँट देता है, पिटाई कर देता है, हकाल देता है, गालियाँ देता है। फिर भी अपने जज्बातों को काबू रखकर अपना काम करने की कोशिश कर देता हूँ। पर जब पारा सर से ऊपर उठ जाता है, तब शांतिपूर्ण तरीके से काली पट्टी बांध कर काम करता रहता हूँ, नहीं सुनवाई होती तो हड़ताल करने या नारे लगाने की कोशिश करता हूँ। इस सब के बावजूद कभी भी आकस्मिक चिकित्सा पर असर नहीं पड़ने देता, मारपीट नहीं करता। पर इस बार जब काम रोकने के बाद आपके दरबार (हाँ, दरबार ही तो है, आप बादशाह अकबर से कम थोड़ी ना समझते खुद को) में अपने अधिकारों के लिए गुहार लगाने आया तो आपने एक मजदूर से तुलना करके भगा दिया, बोल दिया कि बिना सुरक्षा के काम नहीं कर सकते, तो डॉक्टर बनने लायक नहीं है, किसी की जान नहीं बचा सके, तो डॉक्टर बनने लायक नहीं है, अपनी पिटाई के बावजूद अगर मरीज को ठीक ना कर सके, तो डॉक्टर बनने लायक नहीं है। 

आपके इस निर्णय के हिसाब से तो हमारे प्रधानमंत्री देश की प्रगति नहीं करा सकते तो वह काम के लायक नहीं है, हमारे वित्तमंत्री अर्थव्यवस्था को ठीक नहीं लार सके तो वह काम के लायक नहीं है, हमारे सुरक्षामंत्री चीन द्वारा हड़पी हुई ज़मीन नहीं ला सके तो वह काम के लायक नहीं है,,, और महोदय आपके वक्तव्य के अनुसार तो आप भी काम के लायक नहीं है। न्यायपालिका में सालों से करोड़ो केस पेंडिंग है, और फाइलों के ढेर लगते जा रहे है, आदमी न्याय की आशा में भगवान को प्यारा हो जाता है (हाँ यह बात अलग है की चिंकारा की आत्महत्या के केस को आप पहले सुलझा देते हैे,आखिर प्रोड्यूसर के पैसों का सवाल है; एक आतंकवादी की सजा माफ़ कराने के लिए आधी रात को भी आप अपनी सुहानी नींद को तोड़कर निर्णय सुनाने आ जाते है, आखिर TRP वाला केस है)। पर आप पर उंगली उठाना पाप है, उसी तरह जैसे भगवान के होने पर संदेह करना पाप है, पंडित/मौलवी को दक्षिणा नहीं देना पाप है, मंदिर/मस्जिद में चढ़ावा नहीं देना पाप है। आप पर ऊँगली उठाना स्वयं सृष्टिकर्ता के दामन पर कीचड़ उछालने जैसा है। 

बीच में सुना था की आप लोगों में सबसे सीनियर भगवान(चीफ जस्टिस साब के बारे में बोल रहा हूँ, कंफ्यूज होने की क्या बात है इसमें??) प्रधानमंत्री जी के सामने रो दिए, कि काम बहुत है, लोगों की कमी है। अरे ख़ाक कमी है, थोड़ी सी छुट्टियाँ कम कर दिजिए, बहुत सारे पेंडिंग मामले सुलझ जायेंगे। पर ऐसा कैसे कर सकते है, आखिर भगवान को भी आराम तो चाहिए, चाहे कोई फांसी ही झूल जाए, किसी की जर जमीन क्यों ना बिक जाए, छुट्टियाँ तो बनती है। 

सुरक्षा के लिए पूर्व न्यायाधीश ज़ेड प्लस सुरक्षा मांगते है, और यहाँ बेचारे नए ताजे बने हुए डॉक्टर अगर सुरक्षा के बिना काम नहीं कर सकते तो वह फैक्ट्री के मजदूर हो गए। होश की दवा कीजिये साब, मेहनत करके माँ बाप अपने बच्चे को बड़ी आशाओं के साथ डॉक्टर बनने भेजते है, और बच्चा इन आशाओं का बोझ लिए अपनी जिंदगी के सुनहरे साल बर्बाद कर देता है ताकि किसी दिन किसी मरते हुए मरीज का मानसिक रूप से विकलांग रिश्तेदार आके हाथ,पैर, आँखें फोड़ दे। और मुआवजा तो दूर की बात है, उसके बाद जाने कौन कौन से नियमों का हवाला देकर आप उनकी बर्खास्तगी के आर्डर निकाल देते है, चिल्लर जैसी तनख्वाह में भी कटौती कर देते है।

खेर आपको कुछ कहना गलत होगा, आपका समय ख़राब करना होगा। आप लगे रहिये चप्पल और सैंडल में अंतर बताने में, दही हांडी की उचाई नापने में, भाई को जमानत देने में। हम लोगों का तो रोज़ का रोना है, कब तक सुनते रहेंगे। कान में रुई डालिये, और चैन की बांसुरी बजाइये, जैसे नीरो रोम जलने के समय बजा रहा था। आपके पद की गरिमा तो बनी रहनी चाहिए, चाहे वह किसी को जान गवांकर ही बनानी क्यों ना पड़े।
धन्यवाद।🙏🙏🙏


आपका (शायद) चिकित्सक 🤕🤕🤕


(P.S. बुरा मत मानियेगा जज साब, अभीव्यक्ति की स्वंत्रता का नाजायज फायदा उठा लिया। कारावास में नहीं डाल दीजियेगा). ☺☺

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