होली कब है? कब है होली??

होली का रंग बिरंगा त्यौहार फिर से आ गया है। आप कहेंगे, इसमें कौन सी नयी बात बता दी मैने, हर साल ही तो आता है, कोनसा तीर मार लिया मेने यह बताकर। अरे भाई मेरे, विद्वान् पुरुष, मान लिया होली हर साल आती है, पर में हर साल थोड़ी ना लिखता हूँ। मेरा तो पहला साल ही है, जब होली के रंगो के साथ मेरी कलम के रंग भी फैलेंगे। जितना महत्वपूर्ण होली है, उतनी ही महत्त्वपूर्ण मेरी लेखनी भी है। मेरा लिखना कोई पर्व से कम है क्या?? पर आपको तो मेरे लिखने से जलन है, आपको लगता है की मैं लिखूँगा तो लोग मेरी तारीफ़ करेंगे, मुझे शाबाशी देंगे, और आपको यहाँ मेरे ज्ञान से परेशानी है। अरे यार मेरी इच्छा!!!

मैं लिख रहा हूँ, आपको परेशानी है तो मत पढ़ो, कोई जोर जबरदस्ती नहीं है। किसी ने कहा है क्या आपको कि आप अपना jio की sim वाला मुफ़्त इंटरनेट चलाकर मेरा लेख पढ़ो। आप जाओ फेसबुक पर सुन्दर कन्याओं के रंग खेलते हुए चित्रों पर like और comment करने, आप भेजो होली के व्हाट्सऐप वाले घिसे पिटे हुए सन्देश लोगों को, आप ज्ञान दो लोगों को पानी रहित होली मनाने के लिए!! भाई, मुझे ज्ञान मत बांटो, मैं लिखता हूँ, तो आपकी छाती पे साँप क्यों लोटते है?? साला, इस देश में प्रतिभा की कमी नहीं है, कदर करने वालों की कमी है। कोई काम करेगा नहीं, आ गए नीचे से टांग खींचने।

खेर रहने देते है, हर बार का रोना है।

हाँ तो मैं कह रहा था की भाई होली आ गयी है, मतलब जीवन में मस्ती फिर से आ गयी है, मजा फिर से आ गया है। इस त्यौहार का सबसे बड़ा फायदा है कि कोई खर्चा ज्यादा नहीं होता। मतलब रंग, गुब्बारे, भाँग का क्या खर्चा, और सबसे मजे की बात है की खेलने में मजा भी बहुत आता है, यानी कि हींग लगे ना फिटकरी, और रंग भी चोखा आये।।

मान लिया आजकल रंग महँगे आने लगे है, तो किसने कहा है हर्बल रंग इस्तेमाल करो, अरे जी भर के सस्ते रंग इस्तेमाल करो, लगाना सामने वाले को है, उसकी चमड़ी है, करता रहेगा साफ़ दिन भर, आप तो उसके मॉल से ख़रीदे हुए महँगे रंगो का मजा लो, चाहो तो थैली भर लो (बाद में दूसरे लोगों को ज़रा सा लगाकर हवाबाजी कर लेना की आप भी महँगे रंग इस्तेमाल करते हो), वो कहते है ना, “बुरा ना मानो होली है“। वैसे यह भी सही है कि होली है, बुरा मत मानो। इस बहाने से लड़के हुड़दंग कर लेते है, लड़कियों को छेड़ लेते है, जिस पर चाहे रंग और गुब्बारे फेंक देते है (गनीमत है, लोग दीवाली पर बुरा ना मानो दिवाली है, बोलकर बम नहीं फेंक देते)। हाँ तो होली सस्ता त्यौहार है, लोग रंग से खेलते है, गुब्बारे मारते है और भाँग पीते है। भाई भाँग के तो कहने ही क्या?? छक कर ठंडाई में छान कर पियो, और दिन भर relaxed रहो, आराम फ़रमाओ। लोग जबरन बुराई करते है, कि नशा है, मत करो, अब भोलेनाथ का प्रसाद है, उसकी बेइज्जती कैसे कर दे (ऊपर वाले को भी कुछ जवाब देना है ना, धर्म नाम की कोई चीज़ है भी या नहीं??)। आपकी तरह देशी विदेशी दारु पीकर उल्टियाँ तो नहीं करते। हर चीज़ में खोट निकालने से बाज आइये। 

होली में हुड़दंगो के मजे रहते है, दिन भर मस्ती करो, भांग पियो, सुबह जल्दी नहाओ मत (यह सबसे बढ़िया है, एक दिन तो काम या पढ़ाई करने के लिए सुबह उठना नहीं)। घर में कोई जबरदस्ती नहीं, कि उठो, काम पर जाओ। उल्टा इस दिन भाँति भाँति के पकवान अलग सजा कर दिए जाते है, दही पकौड़ी, गुझिया, गुलाबजामुन, इत्यादि, और खाने के पहले नहाने की बेमन से की जाने वाली मज़बूरी नहीं।

कुछ लोग नाटक करते है, हम नहीं खेलते, हमे रंगो से एलर्जी है, यह समय और पानी का दुरूपयोग है, फलाँ, फलाँ। होली खेलने से कोई मना करता है कोई, कौन से  ग्रह के निवासी हो तुम?? ऐसा कहकर 2-3 बार इन भले मानुषों को हमने जी भर के रंग पोता, अगली बार या तो वह शहर के बाहर वाले वाटर पार्क में बैठे हम को गालियाँ बक रहे होते थे, या घर का बाहर से दरवाज़ा बंद कर छुप जाते थे, कायर कहीं के। हम को 10 लोगों में बदनाम किया सो अलग!!

बड़े बूढ़े लोग भी आज के दिन खुश रहते है, ठंडाई और मिठाई के बहाने शक्कर खाने को मिल जाती है, नहीं तो साल भर भिखारियों जैसी हालत, मांगते रहो, डायबिटीज का हवाला दे कर डाँट दिया जाता है। 

ऊपर से इस दिन अपनी armchair में बैठकर अपने बाबा आदम के ज़माने वाले किस्से सुनाकर लोगों को पकाने का मजा अलग ही है। 

इन सब के बीच महिलाओँ के लिये कुछ नया नहीं, दिन भर वही चौका-चूल्हा और उसके बाद थकान होने के बावजूद घर साफ़ करना जिसे पति और बच्चों के दोस्तों ने जी भर कर गन्दा किया हो। ऊपर से अगर होली खेलने के लिये जाओ तो बड़े लोग ऐसे चरित्र का विश्लेषण करते है, जैसे जमाने भर का पाप कर दिया हो। उनके भी सपने है, इच्छाएँ है, उनको क्यों दबाना?? इन सब के बीच डर यह कि कोई रंग लगाते समय सीमा ना लाँघ ले, इलज़ाम तो खुद पर ही लगना है। इस विषय पर बहुत लिखा जा चुका है, इसे यही विराम देता हूँ।

तो भाई, इस से यह तो सिद्ध हो गया की होली सबसे बड़ा त्यौहार है (और सस्ता भी), दीवाली, दशहरा से भी बड़ा।। और इसको ना मनाना इसका अपमान है, धर्म का अपमान है, देश का अपमान है, जीवन का अपमान है। अतः इसे मनाइये, आपसी सौहार्द बढ़ाइये,  देश को बेवजह के ख़र्चों से बचाकर GDP बढ़ाने में मदद कीजिये। 

वैसे लिखने को और भी बहुत कुछ है, 2-3 पन्ने और लिख सकता हूँ, पर फिर यह बकवास पढ़ेगा कौन?? इसलिए यही इजाजत लेता हूँ, अपना पोथी पन्ना लिए फिर मिलूंगा।

धन्यवाद्।।

आप सभी को होली की बहुत बहुत शुभकामनायें।।

स्वस्थ रहे, सुरक्षित रहे।

रंग बरसे।।।

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