वैलेंटाइन डे: क्या इसे राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया जाये???

​आप सभी को वैलेंटाइन डे और वैलेंटाइन हफ्ते की हार्दिक बधाईयाँ। महान संत वैलेंटाइन ने जब इस दिवस की स्थापना करने के बाद स्वर्ग को प्रस्थान किया होगा, तब सोचा भी नहीं होगा कि इस दिन को लेकर भारत वर्ष में इतना रायता फैलाया जायेगा। जितनी जोरो शोरों से इस दिन की तैयारी होती है, उतनी तो दिवाली, दशहरा की भी नहीं होती हमारे देश में

लड़के इस दिन के इंतज़ार में रहते है की कब यह दिन आये और अपने कॉलेज, मोहल्ले की अपनी पसन्द की युवती को प्यार का इजहार करे। लडकिया इंतज़ार में रहती है की चलो एक मुर्गा फंसेगा, जो अच्छा खाना खिलायेगा, पिक्चर दिखायेगा, बाइक का पेट्रोल जलाएगा, सुन्दर से टेडी बीयर देगा, इम्पोर्टेड चॉकलेट देगा और साल भर मोबाइल का रिचार्ज करायेगा (धन्य हो अम्बानी, जिसने लड़को का मोबाइल का खर्च बचा दिया, बहुत से लोग इस बार दुआएं देंगे)।

आर्चीज, हॉलमार्क के बड़े शोरूम और गली के गुप्ता जी की छोटी सी दुकान में एक जश्न जैसा माहौल रहता है। दुकान पे वैलेंटाइन डे के स्टीकर के साथ नकली फ़ूलों की लड़िया लटक जाती है। गत्ते के डब्बों में भरे पुराने गिफ्ट, टेडी, रैपर और किस्म किस्म के खिलोने, कांच की बोतलें निकाले जाते है, धूल पोंछ कर साफ़ करके रखे जाते है और दुगनी कीमत के टैग लगाकर कटने वाले बकरों के इंतज़ार में बांछें फैलायी जाती है।महंगी चोकोलेटो के डब्बे सामने रखे जाते है, और सस्ते डब्बे नीचे रख दिए जाते है। यही नहीं, सस्ते गिफ्ट और चॉकलेट, ग्रीटिंग उठाने वालो को हिकारत की नज़रों से देखा जाता है। 

फूलों की दूकान पर नए गुलदस्ते सज जाते है, भाव बढ़ा दिए जाते है, खासकर लाल गुलाबों के (आखिर, सच्चे प्यार की निशानी जो है)। भिन्न किस्म के नाम वाले सस्ते फूल महंगे गुलदस्तों में बेचे जाते है।

टीवी पर स्पेशल कार्यक्रम आते है, जो देश भर में वैलेंटाइन डे की तैयारियों का जायजा लेते है, और पहले से फ्रस्ट्रटेड बच्चों को और फ्रस्ट्रेट करते है (इनके कार्यक्रम लगातार देखने के बाद कोई आत्महत्या पर भी मजबूर हो सकता है)।

रेस्टॉरेन्ट और होटलों में विशेष प्रोग्राम की घोषणा की जाती है, जिसमे जोड़ों को स्पेशल डिस्काउंट दिया जाता है। बासी खाने को अच्छे से बर्तनों में सजा कर, डीजे का कान फाडू शोर लगाकर लाल कलर के गुब्बारों से दीवारें रंग कर भोले भाले बच्चों का काटा जाता है  (क्या काटा जाता है, समझदार लोग अच्छे से समझ गए होंगे 😜)। कुछ लोग शराब की और विशेष किस्म के नशे की भी व्यवस्था रखते है, जरुरत पड़ने पर उपलब्ध कराने में उन्हें कोई गुरेज़ नहीं है।

पुलिस वाले इस दिन बड़े चुस्त दुरुस्त रहते है, उन्हें पता है की आज पैसे बनाए जा सकते है, घर पे बीवी वैलेंटाइन डे के उपलक्ष्य में नयी साड़ी जो मांगने वाली है, तनख्वाह से तो वो आने से रही। तो हर चौराहे पर कड़ी सुरक्षा होगी, दारु पीने वालो से अलग चालान लिया जायेगा, लड़कियों के सौंदर्य पान का लाभ उठाया जायेगा, सुरक्षित रहने की हिदायत दी जायेगी (दूसरों से, खुद से नहीं), होटल वालो से स्पेशल जेबखर्च लिया जायेगा, नहीं तो लाउड स्पीकर जब्त कर लिए जायेगे। और समाज के तथाकथित ठेकेदार (बस इनके बारे में लिखने ही वाला हूँ), जो झुण्ड बनाकर निकलेंगे, उनकी सहूलियत का ध्यान रखा जायगा।

तो अब इन धर्मप्रेमी सामाजिक रक्षको के बारे में बात कर ले। यह वैलेंटाइन डे का इंतज़ार अपने जन्मदिन या परीक्षा परिणाम के दिन से भी ज्यादा करते है। आज के दिन यह सबसे ऊपर है; समाज से, क़ानून से, लोगो से, यहाँ तक की देश से भी। आखिर धर्म का झंडा जो लेकर घूमना है। यह हर जगह पाये जाते है, पर मुख्यतः बगीचें इनका निशाना होते है। और आखिर हो क्यों नहीं, यही पर तो प्रेम रत युगल एक दूसरे की आँखोँ में खोये रहते है। धर्मप्रेमी लोगों के पास इस विदेशी बीमारी (हां इन लोगो के हिसाब से यह बीमारी ही है) के कई अचूक इलाज़ है, जैसे कि उठक-बैठक लगवाना, लड़को को चांटे मारना (महिला धर्मरक्षक लड़कियों पर हाथ उठाने के लिए स्वतंत्र है), जूतों का हार पहनाना, मुँह पर कालिख पोतना, इत्यादि। अगर इनसे कोई जोड़ा बच जाता है, तो उसको हनुमान मंदिर में जाकर 11 रूपये का प्रसाद चढ़ाना चाहिए (गिफ्ट और कार्ड के बाद इतना बच जाए, वही बहुत है)। 😂😂😂

धर्मरक्षकों को वैसे यह जान लेना चाहिये की हमारे देश के एक आदिवासी बहुल क्षेत्र निमाड़ में होली के पहले एक ऐसा ही उत्सव् आता है, जिसे भगोरिया कहते है, और उसमे भी नौजवान एक दूसरे को प्रेम का इजहार करते है (पर वो किसी विदेशी संत ने नहीं दिया है, इसलिए उसका बहिस्कार पूर्णतः वर्जित है, आखिरकार वह हमारी महान संस्कृति का हिस्सा है)।😑😑

इस बीच में हम जैसे लोग जो अब जवान नहीं कहलाते, और अधेड़ होने से भी अभी बचे हुए है, बड़े असमंजस में रहते है। शादी हो गयी है, कइयों के बच्चे भी हो गए है, और काम और दुनिया की मगज़ मारी में बस मानसिक तनाव से बचते हुए जैसे तैसे जिन्दा है, इस चिंता में है की बीवी इस बार कोई वैलेंटाइन डे के नाम पर स्यापा नहीं फैला दे की होटल लेकर जाओ, नए कपडे दिलाओ, और पिक्चर दिखाओ। कसम से टैक्स बचाने के लिए रखी गयी धनराशि को ऐसे फूंकने में छाती पे सांप लौटने लगते है।

बरहाल, इस सब के बाद यह तो साफ़ हैं कि, वैलेंटाइन डे किसी भी त्यौहार से बड़ा है और इस बात को ध्यान रखते हुए इसे एक शासकीय अवकाश घोषित कर देना चाहिए। लोगो को अपने प्रेम इजहार के लिए समय भी मिलेगा, और हम जैसे लोगो को एक दिन का आराम भी।

धन्यवाद!!!

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